सुशी मैक्किनोन को ये याद ही नहीं कि वो कभी बच्ची थीं. उन्हें अपनी ज़िंदगी के किसी भी दौर की बातें याद नहीं.
सुशी अभी उम्र के साठवें दशक में हैं. उन्हें अपनी ज़िंदगी के अहम लम्हे भी याद नहीं हैं. उन्हें ये पता है कि वो अपने भतीजे की शादी में गई थीं.
सुशी मैक्किनोन को ये भी पता है कि उनके पति भी उनके साथ शादी में गए थे. मगर, सुशी को शादी में होने की बातें याद नहीं हैं.
हाल ये है कि सुशी मैक्किनोन को अपनी ज़िंदगी की कोई बात ही याद नहीं. मगर, उन्हें भूलने की बीमारी नहीं है.
तो, फिर आख़िर सुशी मैक्किनोन को क्या बीमारी है?
कैसी बीमारी है ये?
कई बरस तक सुशी को ये पता ही नहीं था कि वो बाक़ी लोगों से अलग है.
हम ये समझते हैं कि हर इंसान का दिमाग़ एक जैसा की हाम करता है. हम इस बात पर कभी भी चर्चा नहीं करते कि यादें होने से कैसा एहसास होता है.
जब सुशी मैक्किनोन के परिचित लोग अपनी ज़िंदगी के तमाम क़िस्से सुनाते थे, तो, उन्हें लगता था कि वो तो लोगों का मन बहलाने के लिए कहानियां गढ़ रहे हैं.
लेकिन, जब मेडिकल की ट्रेनिंग ले रहे सुशी के एक दोस्त ने उनसे याददाश्त का एक टेस्ट देने को कहा, तब जाकर पता चला कि सुशी को अपनी ज़िंदगी की बातें तो याद ही नहीं.
सुशी को जब अपने बारे में ये बात समझ में आई, तो उन्होंने एम्नेज़िया यानी भूलने की बीमारी पर रिसर्च की.
लेकिन, जिन लोगों की याददाश्त किसी बीमारी या ज़हनी चोट की वजह से गुम हो गई थी, उनके तजुर्बे सुशी को अपने जैसे नहीं लगे.
सुशी को ये तो याद था कि घटनाएं हुई थीं. बस, वो वहां मौजूद रहने या उन घटनाओं की गवाह रहने की बातें भूल गई थीं.
एक दशक पहले सुशी मैक्किनोन का पैर टूट गया, तो उन्हें घर पर रहना पड़ा. खाली वक़्त में सुशी ने दिमाग़ के समय चक्र वाले तजुर्बों के बारे में रिसर्च की.
इसके बाद सुशी ने इस बारे में रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक से संपर्क करने का फ़ैसला किया.
सुशी ने जब इस बारे में टोरंटो के बेक्रेस्ट स्थित रोटमैन रिसर्च इंस्टीट्यूट के ब्रायन लेवाइन को ख़त लिखा, तो वो बहुत नर्वस थीं.
लेकिन, जब ब्रायन लेवाइन को सुशी का ई-मेल मिला, तो, वो बहुत उत्साहित हो गए.
दोनों लोगों की बातचीत का नतीजा ये निकला कि, सुशी की बीमारी का नाम तय हो गया - सेवरली डेफिशिएंट ऑटोबायोग्राफिकल मेमोरी.
सुशी अभी उम्र के साठवें दशक में हैं. उन्हें अपनी ज़िंदगी के अहम लम्हे भी याद नहीं हैं. उन्हें ये पता है कि वो अपने भतीजे की शादी में गई थीं.
सुशी मैक्किनोन को ये भी पता है कि उनके पति भी उनके साथ शादी में गए थे. मगर, सुशी को शादी में होने की बातें याद नहीं हैं.
हाल ये है कि सुशी मैक्किनोन को अपनी ज़िंदगी की कोई बात ही याद नहीं. मगर, उन्हें भूलने की बीमारी नहीं है.
तो, फिर आख़िर सुशी मैक्किनोन को क्या बीमारी है?
कैसी बीमारी है ये?
कई बरस तक सुशी को ये पता ही नहीं था कि वो बाक़ी लोगों से अलग है.
हम ये समझते हैं कि हर इंसान का दिमाग़ एक जैसा की हाम करता है. हम इस बात पर कभी भी चर्चा नहीं करते कि यादें होने से कैसा एहसास होता है.
जब सुशी मैक्किनोन के परिचित लोग अपनी ज़िंदगी के तमाम क़िस्से सुनाते थे, तो, उन्हें लगता था कि वो तो लोगों का मन बहलाने के लिए कहानियां गढ़ रहे हैं.
लेकिन, जब मेडिकल की ट्रेनिंग ले रहे सुशी के एक दोस्त ने उनसे याददाश्त का एक टेस्ट देने को कहा, तब जाकर पता चला कि सुशी को अपनी ज़िंदगी की बातें तो याद ही नहीं.
सुशी को जब अपने बारे में ये बात समझ में आई, तो उन्होंने एम्नेज़िया यानी भूलने की बीमारी पर रिसर्च की.
लेकिन, जिन लोगों की याददाश्त किसी बीमारी या ज़हनी चोट की वजह से गुम हो गई थी, उनके तजुर्बे सुशी को अपने जैसे नहीं लगे.
सुशी को ये तो याद था कि घटनाएं हुई थीं. बस, वो वहां मौजूद रहने या उन घटनाओं की गवाह रहने की बातें भूल गई थीं.
एक दशक पहले सुशी मैक्किनोन का पैर टूट गया, तो उन्हें घर पर रहना पड़ा. खाली वक़्त में सुशी ने दिमाग़ के समय चक्र वाले तजुर्बों के बारे में रिसर्च की.
इसके बाद सुशी ने इस बारे में रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक से संपर्क करने का फ़ैसला किया.
सुशी ने जब इस बारे में टोरंटो के बेक्रेस्ट स्थित रोटमैन रिसर्च इंस्टीट्यूट के ब्रायन लेवाइन को ख़त लिखा, तो वो बहुत नर्वस थीं.
लेकिन, जब ब्रायन लेवाइन को सुशी का ई-मेल मिला, तो, वो बहुत उत्साहित हो गए.
दोनों लोगों की बातचीत का नतीजा ये निकला कि, सुशी की बीमारी का नाम तय हो गया - सेवरली डेफिशिएंट ऑटोबायोग्राफिकल मेमोरी.
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